महावीर जयंती पर विशेष, हर बीमारी के वायरस से बचाने में कारगर है जैन पद्धति

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1. क्या आप जानते हैं कि जैन साधु मुंह पर कपड़ा क्यों बांधते हैं?

जैन पद्यती में इस मास्क को मुहपति कहते हैं। ये इसलिए बांधा जाता है ताकि मुह से निकलने वाले कीटाणु दूसरे के चहेरे पर ना जाएं. आज के कोरोना काल में यही परंपरा पूरी दुनिया में मानी जा रही है। इस पद्धति की शुरुआत हजारों वर्ष पहले भगवान ऋषभदेव ने की थी. भगवान ऋषभदेव का मानना था कि इंसान को छोटे से छोटे प्राणी के प्रति करुणा दिखानी चाहिए। छोटे-छोटे जीवों के प्रति दया का भाव हर इंसान के लिए ज़रूरी है । भगवान ऋषभदेव ने जिस परंपरा को शुरू किया था उससे आज भी सभी जैन साधु और साधक निभा रहे हैं.

2. जैन धर्म में गरम पानी पीने की परंपरा

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से कहा कि गरम पानी पीना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है और वो खुद कई साल से गरम पानी का सेवन कर रहे हैं। आयुष मंत्रालय ने भी गरम पानी के सेवन को कोरोना से बचाव का जरिया माना है। असल में इस पद्यति को हज़ारों वर्ष से भारतीय परंपराओं में माना जा रहा है। जैन पद्धति में लंबे वक्त से गर्म पानी पीने की परंपरा है. ऋषियों के मुताबिक गरम पानी से रोगों कि संभावनाएं कम हो जाती हैं।

3.सूर्यास्त के पश्चात खाना नहीं खाना

मशहूर फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार कई बार कह चुके हैं कि वो शाम 6.30 बजे तक खाना खा लेते हैं और यही उन की अच्छी सेहत का राज है। असल में इस जीवन विधि की शरुआत भी जैन धर्म में ही हुई थी। ज्यादातर जैन साधु इस परंपरा का पालन करते हैं और स्वास्थ्य रहते हैं।

4.शाकाहार को अपनाना जरूरी

जैन धर्म के मुताबिक सुझाए गए खान पान और आचरण को अपनाया जाए तो कारोना जैसे वायरस हमेशा दूर रहेंगे। जैन ऋषियों के मुताबिक जो मनुष्य जीवन में जितनी हिंसा करेगा उतना ही परेशान करेगा। शाकाहार को अपनाने से मनुष्य का मन भी शांत रहेगा और तन भी स्वस्थ रहेगा। ये बात आज सच साबित हो रही है

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