स्वामी रामदेव की चीन के खिलाफ ‘जंग’, शुरू हुई ड्रैगन के बहिष्कार की मुहिम, मामला यू एन तक पहुंचा

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कोरोना वायरस को लेकर चीन पर ‘जैविक युद्ध’ छेड़ने के खिलाफ मुहिम तेज हो गई है। इस मामले को लेकर ‘इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ ज्यूरिस्ट’ (आईसीजे) और ऑल इंडिया बार एसोसिएशन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) का दरवाज़ा खटखटाया है वहीं योग गुरू स्वामी रामदेव ने भी विश्व समुदाय से चीन के आर्थिक और कूटनीतक बहिष्कार करने की वकालत की है।
स्वामी रामदेव ने कहा कि ”सचमुच चीन ने अमानवीय और अनैतिक कार्य किया है तथा सम्पूर्ण विश्व को घोर संकट में डालने का कृत्य किया है।” उन्होंने कहा, “इसके लिए विश्व समुदाय द्वारा चीन को कूटनीतिक और आर्थिक दण्ड दिया जाना चाहिए और इसका कूटनीतिक एवं आर्थिक बहिष्कार करना चाहिए।‌”
स्वामी रामदेव के मुताबिक ” दुनिया के सबसे बड़े प्रजातंत्र भारत को भी चीन को अलग-थलग करने के लिए कूटनीतिक पहल करनी चाहिए।”
उधर, आईसीजे और एआईबीए ने यूएनएचआरसी में चीन के खिलाफ शिकायत दायर में कहा है की है कि कोरोना महामारी के रूप में पूरे विश्व में ‘मानवता के खिलाफ गंभीर अपराध’ हुआ है। आईसीजे और एआईबीए के अध्यक्ष डॉ अदिश सी अग्रवाल ने यूएनएचआरसी में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि इन्होंने दुनिया के खिलाफ ‘एक जैविक युद्ध की साजिश’ रची है।
आरोप ये भी है कि कोरोना ‘चीन की सरकार की साजिश थी, जिसका उद्देश्य विश्व की महाशक्ति के रूप में खुद को उभारना और जैविक युद्ध के माध्यम से अन्य देशों को कमजोर करना था। अर्जी में यह भी आरोप लगाया है कि कोविड महामारी से निपटने में चीनी सरकार और उनके अधिकारियों ने घोर लापरवाही और अक्षमता या अयोग्यता बरती है। जिसके लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी किए गए विभिन्न चार्टर्स और दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया गया है। लाखों लोगों के जीवन को खतरे में डाल दिया गया है। इसके कारण दुनिया भर में जीवन और व्यवसाय पूरी तरह से ठहर गया है।

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